Who is SINNER?

SINNER

एक वन में एक चील एक सर्प को अपने पंजो में झपट के उड़ती है। समीप में ही स्थित राजमहल में राजा ने ब्राह्मणों को भोज पर आमंत्रित किया हुआ था, और उसी की तैयारी में राजमहल की रसोई में भोजन की तैयारी हो रही थी। भोज में अनगिनत ब्राह्मण आने वाले थे, इसलिए बहुत बड़ी बड़ी कढाइयों में सब्जियां इत्यदि बन रहे थे।

मुख्य रसोइया मुख्य सब्जी सबसे बड़ी कढ़ाई में रसोई के आंगन में बना रहा था। वह चील उसी आँगन के ऊपर से सर्प को पंजे में लिए हुए उड़ती हुई गुजरती है। सर्प आत्मरक्षा के लिए प्रयासरत था और चील के पंजे से अपने आप को मुक्त कराने में सफल हो जाता है। और आसमान से सीधा कढ़ाई में गिर जाता है। रसोइया यह देख नहीं पाता।
ब्राह्मण जन प्रेम से भोजन करते हैं, और उस जहरीली सब्जी को खाके मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं। यह देख राजा और रसोइया बहुत दुखी हो जाते हैं और स्वयं को ब्रह्म हत्या के पाप का भागीदार समझ के आत्मग्लानि से भर जाते हैं। शोकाकुल हो जाते हैं।

यमलोक में यम के दरबार में एक विचित्र समस्या हो जाती है। चित्रगुप्त समझ नहीं पा रहे होते कि इस विशाल ब्रह्म हत्या का जिम्मेदार कौन है। और यह समस्या चित्रगुप्त यम और देवताओं के दरबार उठाते हैं। चील तो अपने भोजन के लिए सर्प को लेके उड़ी थी, सर्प तो आत्मरक्षा में पंजे से छूटा था और सब्जी में गिरा था, रसोइया तो यह देख भी नहीं पाया था, और राजा तो कुछ जनता ही नहीं था इस बारे में, वह तो पुण्य का काम कर रहा था। इस प्रकार देवतागण यह निश्चय कर पाने में असफल रहते हैं कि इस महापाप का जिम्मेदार कौन है। और इस चर्चा में देवगणों को एक वर्ष से भी अधिक का समय लग जाता है और कोई नतीजा नहीं निकलता है।

तभी, पृथ्वीलोक पर कुछ ब्राह्मण उसी राज्य की सीमा से गुजर रहे होते हैं। वे ब्राह्मण वहां एक महिला से राजमहल का मार्ग पूंछते हैं। वह महिला उन्हें राजमहल का मार्ग बताती है और उनसे कहती है,”ब्राह्मण जन! संभल के रहियेगा,  वह राजा ब्राह्मणों को जहरीला भोजन खिला के मार देता है।”

देवगण भी यह घटना देखते हैं और देवगुरु तुरंत ही चित्रगुप्त को आदेश देते हैं, कि ब्रह्महत्या के पाप की जिम्मेदारी इसी महिला की लिखो। यमराज शंका से भर जाते हैं और प्रश्न करते हैं, कि यह महिला उस एक वर्ष पहले हुई ब्रह्महत्या की दोषी कैसे?

देवगुरु उत्तर देते हुए कहते हैं, “प्राणि (मनुष्य या जानवर) पाप क्यों करता है? वह पाप आनंद के लिए करता है। चील और सर्प तो अपनी भूख और आत्मरक्षा के लिए प्रयासरत थे। राजा और रसोइया तो तब से शोकाकुल हैं, और आत्मग्लानि से अकारण ही पश्चाताप कर रहे हैं। इस महिला ने ही राजा की निंदा करके उस पाप का आनंद लिया। इसलिए निश्चित ही यही महिला उस ब्रह्महत्या के पाप की भागीदार है।

Paras Mishra

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